Feb 19, 2026
World Radio Day, Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Communication, Bhopal: Radio in Prison: February 13, 2026
Jan 30, 2026
Where walls remember: Notes from Prison: MBIFL: Thiruvananthapuram, Kerala: 30th January, 2026
Day 4 in Kerala: 1st February, 2026
1st February, 2026: Speaker at the Forum Hall at the 7th edition of the Mathrubhumi International Festival of Letters at Thiruvananthapuram, Kerala organised by Mathrubhumi. The panel was on the topic ‘The Paradox of Freedom: Where walls remember: Notes from Prison’ with Professor (Dr.) Vartika Nanda and Rishiraj Singh (retired DG Prisons, Kerala, IPS) as speakers. The panel was moderated by R Nishanthini (IPS, IG, Police Headquarters). The theme of the festival this year was ‘Paradox of Pace’.
Radio in Prison, published by National Book Trust India was discussed at length during the panel.
Sep 29, 2025
RADIO IN PRISON: NEWSLETTER: 2025
Links from the website:
Sep 3, 2025
RADIO IN PRISON: NBT India: Celebrities with the book
RADIO IN PRISON: CELEBRITIES HOLDING THE BOOK
Aug 3, 2025
पुस्तक समीक्षा: Book Review: Radio in Prison: National Book Trust: Government of India
पुस्तक का नाम – रेडियो इन प्रिजन
लेखिका- डा वर्तिका नंदा
पृष्ठ- 200, मूल्य- 295,
प्रकाशक नेशनल बुक ट्रस्ट
समीक्षक: रामधनी द्विवेदी
जेलों में इंद्रधनुष बनाने की कोशिश: जेल रेडियो
जब मैं बरेली में दैनिक जागरण का संपादकीय प्रभारी था, मेरे क्राइम रिपोर्टर सीपी सिंह ने एक दिन मुझसे कहा ‘ सर चलिए आपको एक नई जगह ले चलते हैं।‘ मैने पूछा भी कि कहां तो उसने नहीं बताया। मैं उसकी मोटरसाइकिल पर ही बैठ गया और थोड़ी देर में उसने बरेली सेंट्रल जेल के सामने बाइक रोकी। मैने पूछा ‘यहां कहां’। उसने कहा आइए तो। वह मुझे लेकर जेल सुपरिटेंडेंट के कमरे में गया। और उनको मेरा परिचय दिया। थोड़ी देर वहां रहा। बातचीत हुई। चाय बिस्कुट खाया। जब वहां से निकला तो पूछा’ यहां लेकर क्यों आए। उसने कहा’ सर, सोचा आज आपको जेल का कुछ खिला दें। लोग तो यहां रोज जेल की रोटी मांगने आते हैं।‘ मैने पूछा- ऐसा क्यों, तो उसने कहा ‘ जेल की रोटी खाना एक टोटका है। यदि किसी के नसीब में जेल की रोटी खाना लिखा है तो यह रोटी खा लेने से उसे जेल नहीं जाना पड़ता,ऐसी मान्यता है। मैं जोर से हंसा। अरे मुझे जेल क्यों जाना होगा। उसने कहा कि ‘मैने तो टोटका करा दिया। आपने जेल की बिस्कुट चाय पी ली है। अब कभी बुरे दिन आए तो जेल नहीं जाना होगा। हम लोग रोज खबरें छापते ही हैं न कि सीधे साधे और निरपराध लोग भी कभी ऐसे फंस जाते हैं कि जेल जाना ही पड़ जाता है।‘
जेल ऐसी जगह है कि कोई भी वहां नहीं जाना चाहता। उसका नाम ही डराता है। उसके नाम के साथ ऐसा धब्बा जुड़ा है कि जो भी एक बार जेल हो आया,उसे समाज अच्छी निगाह से नहीं देखता। लोगों की नौकरी चली जाती है। समाज में मुंह दिखाना कठिन हो जाता है। लेकिन टीवी पत्रकार, कई सम्मानों से अलंकृत और वर्तमान में दिल्ली विवि में पत्रकारिता की प्रोफेसर डा वर्तिका नंदा ने जेलों की दीवारों से दोस्ती की,वहां एक बार नहीं कई बार गईं,वहां के कैदियों की दशा देखी और उनके हालात सुधारने के लक्ष्य से अभियान शुरू किया जिसके बहुत ही सुखद परिणाम आए। उन्होंने ‘तिनका तिनका फाउंडेशन’ बनाया जिसके तहत कई सुधारात्मक कार्य किए। उन्होंने इन्हीं अनुभवों को पुस्तकों के रूप में सामने रखा। उनकी चार पुस्तकें आ चुकी हैं जिनमें ताजा है ‘Radio In Prison’ Towards New- Age Reforms.डा नंदा पहली पत्रकार हैं जिन्होने जेल बीट डेवलेप की और उसकी रिपोर्टिंग की। अभी तक मीडिया में यह काम क्राइम रिपोर्टर ही करते आएं हैं।
उन्होने कई जेलों को अंदर से अच्छी तरह देखा और आगरा की सेंट्रल जेल, हरियाणा की जेलों और देहरादून की जेल में अपने कार्य अनुभव को इस पुस्तक में समेटा है। उन्होंने बताया है कि किस तरह उनके जेल रेडियो अभियान ने कैदियों की जिंदगी को बदला और उनमें नई आशा और उर्जा का संचार किया। उनका यह प्रयास जेलों में इंद्र धनुष बनाने की कोशिश है। जिस तरह इंद्र धनुष में सात रंग होते हैं उसी तरह जेल रेडियो से उन्होंने कैदियों के जीवन में सूचना, शिक्षा, मनोरंजन,शोध,लेखन,कला और रचनात्मकता के रूप में सात रंग भरने की कोशिश की है।
पुस्तक में आठ अध्याय हैं। पहला अध्याय में भारत की जेलों की स्थिति बताई गई है। इसमें आंकड़े देकर बताया गया है कि दुनिया में भारत पांचवां देश है जिसमें सबसे अधिक लोग जेलों में हैं। यहां की कुल 1400 जेलों में साढ़े पांच लाख से अधिक लोग बंद हैं। ( ये 2022 के आंकड़े हैं) दुनिया में कुल एक करोड़ से अधिक लोग जेलों में हैं। भारत के आगे अमेरिका,चीन, रूस और ब्राजील ऐसे देश हैं जहां सबसे अधिक लोग जेलों में हैं। भारत के कैदियों में सबसे अधिक 18 से 34 साल के युवा हैं। इनमें भी अधिकतर ऐसे हैं जो पहली बार जेल गए हैं। यह अध्याय भारत में जेलों की स्थिति,ब्रिटिश काल के जेल नियम, उनमें सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देता है। कुछ आंकड़े चौंकाने वाले हैं जैसे अभी तक जेलों के नियम ब्रिटिश काल में बने प्रिजन एक्ट के अनुसार ही हैं। 2023 में इनमें सुधार के लिए कानून बनाए गए हैं जिन्हें अभी लागू नहीं किया गया है। अंग्रेजों का प्रिजन एक्ट ही जेल मैनुअल कहा जाता है। कुछ नियम कानून राज्यों ने अपने बनाये हैं क्यों कि जेल राज्यों के तहत आता है। यह जानकारी भी रोचक है कि अधिकतर जेलें ब्रिटिश काल की ही बनी हैं।
पुस्तक का दूसरा अध्याय अधिक महत्वपूर्ण है। इसमें जेलों में संचार की स्थिति,आपस में संपर्क के नियम-स्थितियां और उनके कैदियों पर पड़ने वाले असर का व्यापक विश्लेषण किया है और यह भी बताया है कि देश और दुनिया में कब-कब जेल की स्थितियां सुधारने के प्रयास किए गए लेकिन अभी तक उनका वांक्षित परिणाम सामने नहीं आया है। इस अध्याय को पढ़ते समय मुझे कई दशक पहले पढ़ी गई मेरी टाइलर की पुस्तक ‘ भारतीय जेलों में पांच साल’ की याद आ गई। उसमें बिहार की जेलों की जो स्थिति बताई गई है, आज भी भारतीय जेलों की कमोबेश वही हालत है। वर्तिका नंदा भी जेलों की स्थिति बताती हुई,यह भी लिखती हैं कि दुनिया के अन्य देशों में क्या स्थिति है और उनमें सुधार के लिए क्या नियम बने हैं। वह बैंकाक रूल्स को बहुत विस्तार से बताती हैं जिनमें कैदियों को संचार-संपर्क की सुविधा देने के लिए नियम बने हैं। वह बहादुर शाह जफर से लेकर जयप्रकाश नारायण तक की किताबों का उल्लेख करती हैं जिनमें जेल जीवन की कठिनाइयों की चर्चा है। भारत के अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर की मन:स्थिति को समझा जा सकता है जब उन्हें लिखने के लिए कागज कलम मुहैय्या नहीं कराई गई और उन्हें जेल की दीवारों पर अपनी शायरी लिखनी पड़ी। इन्हीं सभी कारणों ने ‘तिनका तिनका फाउंडेशन’ की नींव डाली और वर्तिका नंदा को जेल जीवन में सुधार के लिए आगे आना पड़ा।
जेल का अकेलापन,बाहरी दुनिया से संवाद-हीनता,अपनी बात किसी से न कह पाने की विवशता कैदी को शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से तोड़ती है। इसी त्रासदी को दूर करने के लिए जेल रेडियो का विचार जेल सुधारकों के सामने आया। दुनिया में सबसे अधिक लोगों को जेल प्रताड़ना देने वाले ब्रिटेन ने ही इसे सबसे पहले समझा और अपने यहां जेल रेडियो शुरू किया। और अब तो भारत सहित कई देशों में यह काम हो रहा है। भारत में इसे शुरू करने का श्रेय वर्तिका नंदा को ही जाता है। उन्होंने इसे सामाजिक अध्ययन के रूप में लिया और पाया कि इससे कैदियों की एकरसता दूर होने के साथ ही दुनिया के संपर्क में आने से उनमें सकारात्मक सुधार आया। वह अपनी बेटी आरुषि की हत्या में सजा काट रही डा नुपुर तलवार और हरियाणा की महिला कैदी के अनुभव सहित कई कैदियों के अनुभव को भी केस स्टडी के रूप में सामने रखती हैं। वह सिर्फ जेल रेडियो के माध्यम से ही नहीं अन्य कई माध्यमों से भी कैदियों की मन:दशा सुधारने का काम करती हैं।
नेल्सन मंडेला ने एक बार कहा था—‘ किसी देश को तब तक नहीं जाना जा सकता,जब तक उसकी जेलों को अंदर से न देखा जाए। किसी देश का आकलन इस बात से नहीं किया जाना चाहिए कि वह अपने देश के बड़े लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है, बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए कि वह सबसे छोटे व्यक्ति के साथ कैसा व्यवहार करता है।‘
जेल में अपने जीवन का सर्वाधिक समय व्यतीत करने वाले नेल्शन मंडेला के नाम पर ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने कैदियों के साथ व्यवहार के लिए आवश्यक नियम बनाये हैं जिन्हें मंडेला रूल्स कहा जाता है।इसके नियम 63 के तहत रेडिया को जेल में संचार के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यह पुस्तक न सिर्फ जेल को समझने में मदद करती है बल्कि वहां के माहौल को सुधारने में जेल रेडियो स्थापित करने और उसे कैदियों लिए उपयोगी बनाने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रयासों को भी रेखांकित करती है। यह पुस्तक समाजशास्त्रियों के साथ ही पत्रकारिता के छात्रों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।
Jul 27, 2025
Radio in Prison: Report on the book release: 03.03.2025
दिनांक: 03-02-2025
स्थान: विश्व पुस्तक मेला, प्रगति मैदान
आयोजक: नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) और तिनका तिनका फाउंडेशन
मुख्य अतिथि:
मिलिंद सुधाकर मराठे (अध्यक्ष, NBT)
कुमार विक्रम (प्रधान संपादक, NBT)
श्री पी.एन. पांडे (डीआईजीxxx, आगरा रेंज)
सुश्री महेक कस्बेकर (प्रधान संपादक एवं पत्रकार, ब्रूट इंडिया)
डॉ. वर्तिका नंदा (लेखिका, जेल सुधारक एवं तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक)
नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) और तिनका तिनका फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में "रेडियो इन प्रिजन" पुस्तक का विमोचन किया गया। यह भारत में जेल रेडियो पर लिखी गई पहली पुस्तक है, जिसे जेल सुधारक और मीडिया शिक्षिका डॉ. वर्तिका नंदा ने लिखा है। इस पुस्तक में जेलों में रेडियो की भूमिका, कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव और जेल सुधार में मीडिया के योगदान को विस्तार से बताया गया है।
कार्यक्रम में NBT अध्यक्ष मिलिंद सुधाकर मराठे, प्रधान संपादक कुमार विक्रम, आगरा रेंज के डीआईजी जेल, श्री पी.एन. पांडे, ब्रूट इंडिया की प्रधान संपादक एवं पत्रकार सुश्री महेक कस्बेकर और लेखिका डॉ. वर्तिका नंदा उपस्थित रहे। अपने स्वागत भाषण में NBT अध्यक्ष मिलिंद सुधाकर मराठे ने इस पुस्तक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह न केवल जेलों में हो रहे सकारात्मक बदलावों को सामने लाती है, बल्कि समाज को भी इस विषय पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।
पुस्तक विमोचन के बाद "तिनका जेल रेडियो" पर आधारित एक विशेष वीडियो प्रस्तुत किया गया, जिसमें जेल रेडियो की यात्रा और "रेडियो इन प्रिजन" पुस्तक के निर्माण की कहानी को दर्शाया गया। वीडियो की पृष्ठभूमि में डॉ. सुचित नारंग (दृष्टिबाधित कैदी, जिला जेल, देहरादून) द्वारा रचित और गाया गया एक भावनात्मक गीत बजाया गया, जिसने दर्शकों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।
कार्यक्रम का संचालन सुश्री महेक कस्बेकर ने किया। चर्चा के दौरान उन्होंने डॉ. वर्तिका नंदा से पूछा कि भारतीय जेलों में "तिनका जेल पत्रकारिता" की अवधारणा कितनी अनूठी है और इसका कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास पर क्या प्रभाव पड़ता है? इस पर डॉ. नंदा ने बताया कि जेल रेडियो एक ऐसा माध्यम बन गया है, जिसने कैदियों को संवाद करने, अपनी कहानियाँ साझा करने और अपनी रचनात्मकता को व्यक्त करने का अवसर दिया है। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान बेहद प्रभावी साबित हुई, जब कैदी बाहरी दुनिया से कटा हुआ महसूस कर रहे थे।
डॉ. नंदा ने इस बात पर जोर दिया कि जेल रेडियो, पॉडकास्ट, जेल पुरस्कार और जेल जीवन पर लिखी गई पुस्तकों ने जेलों के अनदेखे पहलुओं को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इस पहल के कारण जेलों में अवसाद, आक्रामकता और आत्म-नुकसान की घटनाओं में कमी आई है, क्योंकि यह कैदियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करता है।
आगरा रेंज के डीआईजी JAIL श्री पी.एन. पांडे ने घोषणा की कि जल्द ही उत्तर प्रदेश की जेलों में नए जेल रेडियो स्टेशन शुरू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि यूपी की जेलों में पहले से ही डॉ. वर्तिका नंदा द्वारा महिला कैदियों और उनके बच्चों की संचार आवश्यकताओं पर दी गई सिफारिशों को लागू किया जा चुका है। इस शोध को ICSSR के तहत किया गया था और इसे उत्कृष्ट माना गया था। अगस्त 2024 में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, श्री मनोज कुमार सिंह और जेल महानिदेशक श्री पी.वी. रामासास्त्री द्वारा इसे जारी किया गया था।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) के पत्रकारिता विभाग के छात्रों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने अतिथियों के साथ संवाद किया और जेल सुधार में मीडिया की भूमिका पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. वर्तिका नंदा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जेल की उनकी विविध यात्राएं उन्हें स्वतंत्रता के वास्तविक महत्व को समझने का अवसर देती है—एक ऐसी चीज़ जिसे हम अक्सर हल्के में ले लेते हैं।
चर्चा के दौरान पैनल ने दर्शकों की प्रतिक्रियाएँ भी सुनीं और इस बात पर सहमति जताई कि "रेडियो इन प्रिजन" एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो आम नागरिकों को जेल जीवन की वास्तविकताओं से जोड़ने और इस विषय पर अधिक संवेदनशील बनाने का माध्यम बन सकती है।
"रेडियो इन प्रिजन" पुस्तक का विमोचन जेल सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ है। इस कार्यक्रम ने जेलों में रेडियो की भूमिका और उसके सुधारात्मक प्रभाव को उजागर करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। यह स्पष्ट होता है कि मीडिया, विशेष रूप से रेडियो, कैदियों के मानसिक एवं सामाजिक पुनर्वास में एक प्रभावशाली माध्यम बन सकता है। "रेडियो इन प्रिजन" केवल एक किताब नहीं, बल्कि जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में उठाया गया एक सशक्त कदम है।
आकांक्षा चौधरी
Mar 19, 2025
RADIO IN PRISON AT THE OFFICE OF RESIDENT COMMISSION, J&K
Enjoyed the august presence of Dr. Manisha Priyam, Professor Education Policy at NEPA and Dr. Aditi Paswan, Assistant Professor at Delhi University. It was an honour for me to share thoughts about women in prisons and the journey of Radio in Prison, the recently published book by National Book Trust, India.
LINK- https://www.knskashmir.com/jandk-resident-commission-celebrates-international-women-s-day-193205
WEBSITE LINK: https://tinkatinka.org/radio-in-prison/
Feb 16, 2025
World Radio Day: Webinar by Communication Today: 13 February, 2025
153वीं वेबीनार : दिनांक: 13 फरवरी, 2025
Link:https://youtu.be/rO6gqbH2S3s
मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे और दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भारती विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में वेबीनार शृंखला की 153वीं कड़ी में विश्व रेडियो दिवस मनाया गया।
मुख्य वक्ताओं के विचार
राजीव कुमार शुक्ला
आकाशवाणी के अपर महानिदेशक पद से सेवानिवृत्त साहित्यकार एवं मीडियाकर्मी राजीव कुमार शुक्ला ने रेडियो के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समृद्ध करने में आकाशवाणी की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने रेडियो को सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का एक सशक्त माध्यम बताया।
डॉ. वर्तिका नंदा
जेल सुधारक, मीडिया कर्मी तथा लेडी श्रीराम कॉलेज, दिल्ली में पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. वर्तिका नंदा ने हाल ही में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित अपनी पुस्तक "रेडियो इन प्रिज़न" पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनके संगठन "तिनका तिनका" ने पिछले एक दशक में देश के प्रमुख जेलों में कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
जेलों में रेडियो प्रसारण की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि कैदियों ने माइक्रोफोन की ताकत को पहचाना है, इन कार्यक्रमों से उनके जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। Buy Radio in Prison Towards New-Age Reform Book Online at Low Prices in India | Radio in Prison Towards New-Age Reform Reviews & Ratings - Amazon.in
डॉ. प्रियंका कटारिया
गुरुग्राम यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका कटारिया ने आकाशवाणी में एंकर के रूप में अपने दो दशक के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि आज भी युवा वर्ग रेडियो से गहराई से जुड़ा हुआ है और वे इसके कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भागीदारी के लिए उत्सुक रहते हैं।
प्रो. संजीव भानावत
कम्युनिकेशन टुडे के संपादक और राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष प्रो. संजीव भानावत ने बताया कि यूनेस्को के आह्वान पर 2012 से विश्व रेडियो दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। उन्होंने रेडियो को आम आदमी के जीवन का अनिवार्य हिस्सा बताया और कहा कि रेडियो का प्रभाव आज भी व्यापक रूप से महसूस किया जाता है।
कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद मंगल पांडेय पीजी गर्ल्स कॉलेज, मेरठ में अंग्रेज़ी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ऊषा साहनी द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। उन्होंने वेबीनार के आयोजन की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। भारती विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की सहायक प्रोफेसर प्रियंका सिंह ने मुख्य वक्ताओं को ई-बुके भेंट किया । साथ ही, वक्ताओं को ई-सर्टिफिकेट और ई-स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
सहयोग और योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में भारती विद्यापीठ के शिक्षकों पुष्पेंद्र सिंह, प्रीति सिंह, जयंत राठी, डॉ. सुनील कुमार और अंबुश का विशेष योगदान रहा। इसके अलावा, आईआईएमटी यूनिवर्सिटी, मेरठ की डॉ. पृथ्वी सेंगर ने भी इस प्रयास में सहयोग दिया। आपका सहयोग अपेक्षित है इस विचारशील पहल को और प्रभावशाली बनाने में आपका समर्थन आवश्यक है। कृपया:
Feb 8, 2025
All India Radio: Radio Broadcasting Day and Radio in Prison: 7 February, 2025
All India Radio
Dr. Amar Nath Amar, Dr. Vartika Nanda, Om Nischal,. Anchor: Neelam Malkani
Producer: Ram Avatar Bairva
Assistant Producer: Kriti Baid
Occasion: Radio Broadcasting Day, 13 February
Recording: 7 February, 2025
Telecast: 9 February, 2025
आकाशवाणी, दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ चैनल 366.3 मीटर अर्थात् 819 किलोहर्टज तथा Air Live News 24x7 पर रविवार 9.2.2025 को सुबह 8.45 बजे अवश्य सुनें 'साहित्यिकी' . इस अंक में आप सुन सकेंगें रेडियो प्रसारण दिवस के अवसर पर "आकाशवाणी पर साहित्यिक कार्यक्रम" विषय पर परिचर्चा. इस कार्यक्रम को इन माध्यमों पर निर्धारित समय में सुना जा सकेगा. https://liveradios.in/all-india-radio-news-24x7.html
Download Prasar Bharati's NewsOnAir App from https:// play.google.com/store/apps/details?id=com.parsarbharti.air news to stay updated with latest news as well as All India Radio and Doordarshan Programs.
#साहित्यिकी #आकाशवाणीदिल्ली
At @akashvani_air @airnewsalerts today for the recording of a special show for #worldradioday day. Photos and videos by Kriti Baid. I was happy to hold Radio in Prison.
https://www.instagram.com/reel/DFx1p4ezBRI/?igsh=MWF6a3Fid2FmcDAyeQ==
Feb 4, 2025
Press Release: National Book Trust Releases Radio in Prison, India's First Book on Prison Radio: Monday, 3rd February, 2025
National Book Trust Unveils India’s First Book on Prison Radio at International Book Fair
New Delhi: Radio in Prison, a book published by National Book Trust (NBT) is the first book in India to give a detailed account of radio in jails. The book was released by Milind Sudhakar Marathe (Chairman, NBT India), Kumar Vikram, (Editor-in-Chief ,NBT, India), PN Pandey (DIG, Prisons, Agra Range, Uttar Pradesh, Mehak Kasbekar ( Editor-in-Chief, Brut India) and Dr. Vartika Nanda herself. The book was released in a grand ceremony at the theme pavilion of NBT during the International Book Fair on 3rd February, 2025.
Published by NBT, Radio in Prison explores how prison radio projects, spearheaded by Dr. Nanda’s foundation, have positively impacted inmates by providing them a platform to express themselves and share their stories. The book delves into the transformative role of radio in reducing depression, aggression, and self-harm among prisoners, promoting creativity and healing behind bars. As founder of Tinka Tinka Foundation, Dr. Nanda has conceptualised, selected, trained the inmates and executed prison radios in District Jail, Agra, District Jail, Dehradun and the state of Haryana without any financial support. During the launch, NBT Chairman Milind Sudhakar Marathe praised the book for its thought-provoking insights and highlighted the importance of understanding prison reform through innovative programs like prison radio. He expressed satisfaction at the NBT’s initiative in publishing a book on such an unexplored aspect of prison reforms.
The session, moderated by Mehak Kasbekar, included discussions on jail journalism and the work of the Tinka Tinka Foundation in empowering prisoners to become storytellers and content creators. Dr. Nanda shared her thoughts which led to the inception of TTF. She also narrated her experiences of inmates as storytellers, content creators and producers of programmes for the jail radio. Audience displayed curiosity to understand the role of prison radio, especially during COVID-19 and its role in generating and documenting a rich reservoir of creative wealth in Indian prisons through the use of microphones.. Tinka Jail Radio model, Tinka jail radio podcasts, Tinka Tinka Awards and the books on jail lives by her have contributed in preserving lesser known aspects of prison life. Dr. Nanda further highlighted that jail radio had significantly contributed to decreasing depression, instances of aggression and self harm in jails.
PN Pandey, DIG Prisons (Lucknow Range), revealed plans to extend prison radio stations across Uttar Pradesh, echoing the success of Dr. Nanda’s previous initiatives. Notably, UP Prisons had implemented some of the suggestions made by Dr. Nanda on the communication needs of women inmates and their children. This report was supported by ICSSR and was released by Shri Manoj Kumar Singh, IAS, Chief Secretary, Uttar Pradesh in August 2024.
प्रेस विज्ञप्ति 3 फरवरी, 2025
नेशनल बुक ट्रस्ट ने विमोचित की ‘रेडियो इन प्रिजन’ - भारत में जेल रेडियो पर आधारित पहली पुस्तक
रेडियो इन प्रिजन’ भारत में जेल रेडियो पर लिखी गई पहली पुस्तक है. इसका विमोचन नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) के चेयरमैन मिलिंद सुधाकर मराठे, एनबीटी के प्रमुख संपादक कुमार विक्रम, आगरा रेंज के डीआईजी (जेल) पीएन पांडे, ब्रूट इंडिया की प्रमुख संपादक महक कासबेकर और इस पुस्तक की लेखिका और तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नन्दा द्वारा नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में किया गया.
जेल रेडियो पर विशेष किताब
यह पुस्तक नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित की गई है और इसे भारत की जेल सुधारक और मीडिया शिक्षाविद् डॉ. वर्तिका नन्दा ने लिखा है. इस पुस्तक में जेल में कैदियों के जीवन को बेहतर बनाने में रेडियो की भूमिका को दस्तावेजों और वर्णनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है. तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक के रूप में, डॉ. नन्दा ने जिला जेल आगरा, जिला जेल देहरादून और हरियाणा राज्य में बिना किसी वित्तीय सहायता के जेल रेडियो की संकल्पना, कैदियों के चयन, प्रशिक्षण और क्रियान्वयन किया है.
एनबीटी चेयरमैन मिलिंद सुधाकर मराठे ने अपने भाषण में जोर देते हुए कहा कि "रेडियो इन प्रिजन" पुस्तक को सभी को पढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि जीवन में कुछ घटनाएं बेहद भावनात्मक होती हैं और इस पुस्तक ने ऐसे घटनाक्रमों को सफलतापूर्वक शामिल किया है. उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) ने जेल सुधारों के इस अनछुए पहलू पर पुस्तक प्रकाशित करने की पहल की है.
महक कसबेकर ने सत्र का संचालन किया. उन्होंने चर्चा की शुरुआत "तिनका तिनका फाउंडेशन (TTF)" द्वारा भारतीय जेलों में कखी गई जेल पत्रकारिता की नींव और इसके बंदियों पर पड़े प्रभाव पर अपने विचार भी रखे.
डॉ. वर्तिका नन्दा ने बताया कि जेल रेडियो के लिए कैदियों को रेडियो जॉकी, कंटेंट क्रिएटर और प्रोग्राम निर्माता के रूप में प्रशिक्षित करने का उनका अनुभव कैसा रहा. विशाल सभागार में मौजूद दर्शकों ने COVID-19 के दौरान जेल रेडियो की भूमिका, कैदियों की रचनात्मकता और रेडियो के जरिए जेलों के इतिहास और बंदियों की प्रतिभा को माइक्रोफोन के माध्यम से संजोने की तिनका तिनका की यात्रा को जानने में गहरी जिज्ञासा दिखाई.
डॉ. नन्दा ने यह भी रेखांकित किया कि जेल रेडियो ने बंदियों के मानसिक अवसाद, आक्रामकता और खुद को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में उल्लेखनीय रूप से कमी लाने में मदद की है.
पीएन पांडे, डीआईजी (लखनऊ रेंज) ने आश्वासन दिया कि यूपी की जेलों में जल्द ही नए जेल रेडियो शुरू किए जाएंगे. गौरतलब है कि यूपी जेल प्रशासन ने महिला कैदियों और उनके बच्चों की संचार आवश्यकताओं पर डॉ. नन्दा द्वारा दी गई कुछ सिफारिशों को लागू किया है. इस रिपोर्ट को ICSSR द्वारा सहयोग दिया गया था. इसे अगस्त 2024 में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, श्री मनोज कुमार सिंह (IAS) द्वारा जारी किया गया था.
इस मौके पर एक विशेष वीडियो भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें तिनका जेल रेडियो की यात्रा और "रेडियो इन प्रिजन" पुस्तक के रूप में इसकी यात्रा को दर्शाया गया. इस वीडियो का पृष्ठभूमि संगीत नेत्रहीन कैदी डॉ. सुचित नारंग द्वारा रचित और गाए गए गीत से लिया गया था. सुचित नारंग इस समय जिला जेल, देहरादून में कैद हैं. इस गीत ने सभागार में मौजूद दर्शकों और पाठकों पर गहरा असर डाला.
तिनका जेल रेडियो मॉडल, तिनका जेल रेडियो पॉडकास्ट, तिनका तिनका अवॉर्ड्स और जेल जीवन पर आधारित तिनका की किताबों ने जेल जीवन के कम चर्चित पहलुओं को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.डॉ. नन्दा की किताबें – "तिनका तिनका तिहाड़", "तिनका तिनका डासना" और "तिनका तिनका मध्य प्रदेश" – सभी जेल सुधारों के विषय पर प्रकाश डालती हैं.यह भी बता दें कि लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) के पत्रकारिता विभाग की छात्राओं ने भी इस समारोह में सक्रिय भूमिका निभाई.
चर्चा का समापन डॉ. वर्तिका नन्दा के इस विचार के साथ हुआ कि जेल सुधारों में उनके काम ने उनके दृष्टिकोण को गहराई से प्रभावित किया है. वे आज खुद बेहतर ढंग से आजादी के महत्व को समझ पाईं है.पैनल ने दर्शकों से प्रश्न भी आमंत्रित किए और सामूहिक रूप से यह आशा व्यक्त की कि आम नागरिक इस पुस्तक को अवश्य पढ़ेंगे, जो जेल की दीवारों के भीतर मौजूद रचनात्मकता को उजागर करती है.
Important Links:
Tinka Website link:
https://tinkatinka.org/radio-in-prison/
Amazon:
Instagram Link to Dr. Nanda’s Official Page:
https://www.instagram.com/vartikananda?igsh=bXI1enR5MGZhaWUw
Link to Tinka Tinka Foundation’s YouTube Channel:
https://youtube.com/@tinkatinkaprisonreforms4559?si=JhT6rrFNpfi0ZZFJ
NBT Website Link: Welcome to National Book Trust India
Book release on NBT Website: Fair Daily 4_2025.pdf
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